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भारत में कोयले की वर्तमान स्थिति: एक व्यापक विश्लेषण

परिचय

कोयला भारत में ऊर्जा उत्पादन का एक प्रमुख स्रोत है और देश की औद्योगिक एवं आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वर्तमान में, भारत की कुल वाणिज्यिक ऊर्जा खपत का लगभग 40% कोयले से आता है। हालांकि, कोयले की बढ़ती मांग, खनन संबंधी चुनौतियाँ और पर्यावरणीय प्रभावों के कारण भारत को स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। इस लेख में, हम भारत में कोयले की स्थिति, इसकी खपत, संकट, सरकार द्वारा उठाए गए कदम, और कोयले के भविष्य की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा करेंगे।


भारत में कोयले के प्रकार और उनका वर्गीकरण

कोयला मुख्य रूप से कार्बन से बना होता है और यह जैविक पदार्थों के लाखों वर्षों तक भूगर्भ में दबने से बनता है। कोयले को उसके कार्बन सामग्री और ऊष्मा मूल्य के आधार पर निम्नलिखित प्रकारों में विभाजित किया जाता है:

1. एंथ्रेसाइट कोयला

  • इसमें 90% से अधिक कार्बन होता है और यह उच्चतम गुणवत्ता वाला कोयला माना जाता है।
  • इसकी ऊष्मा उत्पन्न करने की क्षमता अधिक होती है।
  • भारत में यह जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में पाया जाता है।

2. बिटुमिनस कोयला

  • इसमें 60-80% कार्बन होता है।
  • यह ऊर्जा उत्पादन के लिए प्रमुख रूप से उपयोग किया जाता है।
  • इसकी ऊष्मा क्षमता 7600-11000 किलो जूल प्रति किलोग्राम होती है।

3. लिग्नाइट कोयला

  • इसमें केवल 35-50% कार्बन होता है और यह निम्न गुणवत्ता का कोयला होता है।
  • भारत में यह पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पाया जाता है।

4. पीट (Peat) कोयला

  • इसे “गरीब आदमी का कोयला” कहा जाता है क्योंकि इसमें केवल 40% कार्बन होता है।
  • इसकी ऊष्मा क्षमता सबसे कम होती है और यह औद्योगिक उपयोग के लिए कम प्रभावी होता है।

भारत में कोयला खनन और आयात की स्थिति

भारत कोयला उत्पादन में विश्व में अग्रणी देशों में से एक है, लेकिन फिर भी इसे भारी मात्रा में कोयले का आयात करना पड़ता है।

भारत में कोयला खनन की चुनौतियाँ

  1. भूमि अधिग्रहण की समस्याएँ – भूमि अधिग्रहण कठिन होने के कारण कई परियोजनाएँ देरी से पूरी होती हैं।
  2. पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ – कई खनन परियोजनाएँ पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के कारण रुकी हुई हैं।
  3. तकनीकी पिछड़ापन – भारत में पारंपरिक खनन तकनीकों का उपयोग होता है, जिससे खनन क्षमता सीमित रहती है।
  4. विदेशी कोयले पर निर्भरता – भारत में सालाना लगभग 213 मिलियन टन कोयले का आयात किया जाता है।

कोयले के आयात से संबंधित समस्याएँ

  • भारत इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका से कोयला आयात करता है।
  • वैश्विक कोयला कीमतों में वृद्धि से भारत में ऊर्जा लागत बढ़ जाती है।
  • भारत का कुल कोयला आयात 2021 में 44% तक घट गया, जिससे घरेलू उत्पादन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

भारत में बढ़ती बिजली की माँग और कोयले की आवश्यकता

भारत की बढ़ती आबादी और औद्योगीकरण के कारण बिजली की माँग लगातार बढ़ रही है।

बिजली की बढ़ती माँग के कारण

  • 2020 में बिजली की माँग में गिरावट आई थी, लेकिन 2021 के पहले आठ महीनों में यह 13.2% तक बढ़ गई।
  • कोल इंडिया लिमिटेड द्वारा कोयले की आपूर्ति में 24% वृद्धि हुई, लेकिन फिर भी यह पर्याप्त नहीं थी।
  • देश के आर्थिक पुनरुद्धार के साथ थर्मल प्लांटों की बिजली उत्पादन क्षमता 7.4% बढ़ी।

थर्मल पावर प्लांटों की चुनौतियाँ

  • कोयले की आपूर्ति में अनिश्चितता के कारण कई थर्मल पावर प्लांट बिजली उत्पादन में असमर्थ हो गए।
  • कोयले की कीमतों में वृद्धि के कारण बिजली उत्पादन की लागत बढ़ी।
  • राज्यों को बिजली संकट का सामना करना पड़ा, जिससे दिल्ली, राजस्थान और पंजाब जैसे राज्यों में बिजली कटौती हुई।

भारत में कोयला संकट और उसके कारण

अक्टूबर 2021 में भारत को कोयले की भारी कमी का सामना करना पड़ा। इस संकट के पीछे कई कारक जिम्मेदार थे।

1. कोयले की बढ़ती माँग

  • औद्योगिक गतिविधियों के पुनरारंभ के कारण कोयले की खपत बढ़ गई।
  • उत्पादन बढ़ने के बावजूद, माँग की तुलना में आपूर्ति कम रही।

2. अंतर्राष्ट्रीय परिस्थितियाँ

  • वैश्विक स्तर पर कोयले की कीमतों में वृद्धि हुई।
  • इंडोनेशिया में भारी बारिश और चीन में कोयले की बढ़ती माँग के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई।

3. वित्तीय असंतुलन

  • थर्मल पावर कंपनियों द्वारा कोल इंडिया को भुगतान में देरी हुई, जिससे कोयला आपूर्ति बाधित हुई।
  • अगस्त 2021 में बिजली उत्पादन कंपनियों पर ₹313 करोड़ बकाया था।

सरकार द्वारा कोयला संकट से निपटने के प्रयास

भारत सरकार ने कोयला संकट को दूर करने के लिए कई कदम उठाए:

  1. मोबाइल ऐप – कोयले की गुणवत्ता और उपलब्धता की निगरानी के लिए एक नया ऐप लॉन्च किया गया।
  2. नई कोयला लिंक नीति – कोयले की आपूर्ति को व्यवस्थित करने के लिए नई नीति लागू की गई।
  3. डिजिटल पारदर्शिता – कोयला वितरण की निगरानी के लिए एक ऑनलाइन ट्रैकिंग प्रणाली विकसित की गई।
  4. वाणिज्यिक खनन – निजी और विदेशी कंपनियों के लिए कोयला खनन क्षेत्र को खोला गया।

भविष्य में भारत में कोयले की भूमिका

भारत को अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए कोयले के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की ओर भी बढ़ना होगा।

स्वच्छ कोयला प्रौद्योगिकी की आवश्यकता

  • कोयले के जलने से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए नए तरीकों को अपनाना होगा।
  • सरकार को “क्लीन कोल” परियोजनाओं में निवेश बढ़ाना चाहिए।

नवीकरणीय ऊर्जा का विकास

  • कोयले पर निर्भरता कम करने के लिए सौर और पवन ऊर्जा का अधिक उपयोग करना होगा।
  • हाइड्रो और परमाणु ऊर्जा को बढ़ावा देना होगा।

निष्कर्ष

भारत में कोयला ऊर्जा का एक महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन इसकी बढ़ती माँग और पर्यावरणीय प्रभावों को देखते हुए, स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने की आवश्यकता है। सरकार कोयले के आयात को कम करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए विभिन्न उपाय कर रही है। “स्वच्छ कोयला” तकनीकों को अपनाना और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक होगा।

भारत की विजन 2030 योजना के तहत स्वच्छ कोयले और नवीकरणीय ऊर्जा पर ध्यान केंद्रित करना आवश्यक है, ताकि देश की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करते हुए पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Twinkle Pandey

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