परिचय
भारत में बैंकिंग प्रणाली के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के बैंक कार्यरत हैं, जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक, निजी बैंक, विदेशी बैंक, सहकारी बैंक, लघु वित्त बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक शामिल हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण श्रेणी स्थानीय क्षेत्रीय बैंक (Local Area Banks – LABs) की भी है। ये बैंक विशिष्ट क्षेत्रों में वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किए गए हैं।
इस लेख में, हम स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों के बारे में विस्तार से जानेंगे। इसमें इनके उद्देश्य, विशेषताएँ, मार्गदर्शिकाएँ, महत्व, लाभ और कुछ प्रमुख उदाहरणों को शामिल किया गया है।
1. स्थानीय क्षेत्रीय बैंक क्या हैं?
स्थानीय क्षेत्रीय बैंक (Local Area Banks – LABs) भारत सरकार द्वारा स्थापित किए गए छोटे निजी क्षेत्र के बैंक हैं, जिन्हें सीमित भौगोलिक क्षेत्र में काम करने की अनुमति दी गई है। ये बैंक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के विनियमन में कार्य करते हैं और मुख्य रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने के लिए बनाए गए हैं।
स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों की स्थापना का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करना और कृषि क्षेत्र के विकास में योगदान देना है।
2. स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों की विशेषताएँ
स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों की कुछ प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
- सीमित कार्यक्षेत्र: ये बैंक केवल तीन जिलों तक अपनी बैंकिंग सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं।
- निजी स्वामित्व: स्थानीय क्षेत्रीय बैंक निजी क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं।
- छोटे आकार के बैंक: ये बैंक छोटे स्तर पर कार्य करते हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत होते हैं।
- RBI के अधीन कार्य: इनका नियमन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा किया जाता है।
- कृषि एवं लघु उद्योगों को वित्तीय सहायता: ये बैंक मुख्य रूप से किसानों, लघु उद्यमियों और कुटीर उद्योगों को ऋण प्रदान करते हैं।
- संपत्ति और देनदारियों की प्रबंधन सीमा: स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों को अपनी संपत्ति और देनदारियों को नियंत्रित रूप से प्रबंधित करना होता है।
3. स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों की स्थापना और विकास
3.1 स्थापना का उद्देश्य
स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय सेवाएँ प्रदान करना था। सरकार ने यह महसूस किया कि भारत के ग्रामीण इलाकों में वित्तीय समावेशन की कमी है और बड़े बैंक वहाँ तक अपनी सेवाएँ प्रदान करने में सक्षम नहीं हैं। इसलिए, छोटे स्थानीय स्तर के बैंकों की जरूरत महसूस हुई।
3.2 स्थापना का समय और नीति
स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों की स्थापना के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने 1996 में दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके अंतर्गत निजी क्षेत्र की कंपनियों को भी ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएँ देने की अनुमति दी गई।
4. स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों के लिए RBI की मार्गदर्शिकाएँ
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों के संचालन के लिए कुछ विशेष दिशा-निर्देश बनाए हैं:
- न्यूनतम पूँजी: स्थानीय क्षेत्रीय बैंक की स्थापना के लिए न्यूनतम पूँजी ₹5 करोड़ निर्धारित की गई है।
- भौगोलिक सीमा: ये बैंक केवल तीन जिलों तक अपनी सेवाएँ प्रदान कर सकते हैं।
- कृषि और लघु उद्योगों को प्राथमिकता: कुल ऋण का कम से कम 40% कृषि और लघु उद्योगों के लिए होना चाहिए।
- निजी क्षेत्र में स्वामित्व: ये बैंक निजी स्वामित्व में होते हैं, लेकिन RBI की सख्त निगरानी में कार्य करते हैं।
- डिपॉजिट और लोन सेवाएँ: ये बैंक ग्राहकों को जमा और ऋण सेवाएँ प्रदान करने के लिए अधिकृत होते हैं।
5. स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों के लाभ
5.1 ग्रामीण विकास को बढ़ावा
स्थानीय क्षेत्रीय बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं का विस्तार करते हैं, जिससे वहाँ के निवासियों को आर्थिक लाभ मिलता है।
5.2 छोटे व्यवसायों को समर्थन
छोटे व्यापारियों और लघु उद्योगों को इन बैंकों से आसान ऋण मिल सकता है, जिससे वे अपने व्यवसाय का विस्तार कर सकते हैं।
5.3 कृषि क्षेत्र में सुधार
किसानों को समय पर ऋण उपलब्ध कराने में ये बैंक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
5.4 रोजगार के अवसर
स्थानीय स्तर पर बैंकिंग सेवाओं के विस्तार से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर पैदा होते हैं।
5.5 वित्तीय समावेशन को बढ़ावा
जो लोग अभी तक बैंकिंग सेवाओं से वंचित थे, उन्हें इन बैंकों के माध्यम से वित्तीय सेवाएँ मिलती हैं।
6. भारत में प्रमुख स्थानीय क्षेत्रीय बैंक
भारत में कुछ प्रमुख स्थानीय क्षेत्रीय बैंक निम्नलिखित हैं:
- Coastal Local Area Bank Ltd. – यह बैंक आंध्र प्रदेश में स्थित है।
- Krishna Bhima Samruddhi Local Area Bank Ltd. – यह बैंक तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में कार्य करता है।
- Capital Local Area Bank Ltd. – यह पंजाब में कार्यरत है।
- Subhadra Local Area Bank Ltd. – यह महाराष्ट्र में संचालित होता है।
7. स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों की चुनौतियाँ
हालांकि स्थानीय क्षेत्रीय बैंक ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाएँ प्रदान करने में मदद करते हैं, लेकिन इन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:
7.1 सीमित कार्यक्षेत्र
केवल तीन जिलों तक सीमित रहने के कारण ये बैंक अपना व्यवसाय ज्यादा विस्तारित नहीं कर सकते।
7.2 पूँजी की कमी
छोटे स्तर पर कार्य करने के कारण इन बैंकों को बड़ी पूँजी प्राप्त करने में कठिनाई होती है।
7.3 प्रतिस्पर्धा का दबाव
बड़े बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक इनके लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा प्रस्तुत करते हैं।
7.4 तकनीकी विकास की कमी
इन बैंकों में डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं की उपलब्धता सीमित होती है।
7.5 उच्च जोखिम
ग्रामीण क्षेत्रों में कार्य करने के कारण ये बैंक ऋण वसूली में कठिनाइयों का सामना करते हैं।
8. निष्कर्ष
स्थानीय क्षेत्रीय बैंक भारत में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है। ये बैंक विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोगों को बैंकिंग सेवाएँ उपलब्ध कराने में सहायक होते हैं। हालांकि, सीमित कार्यक्षेत्र और पूँजी की कमी जैसी चुनौतियाँ इनके विकास में बाधा डाल सकती हैं।
सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को इन बैंकों की भूमिका को और मजबूत करने के लिए नई नीतियाँ अपनानी चाहिए। डिजिटल बैंकिंग सुविधाओं को बढ़ावा देना, ऋण वसूली तंत्र को मजबूत बनाना और सरकारी सहायता प्रदान करना कुछ ऐसे कदम हैं जो स्थानीय क्षेत्रीय बैंकों को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।
यदि इन बैंकों को सही समर्थन दिया जाए, तो वे भारत के ग्रामीण और छोटे व्यवसायों के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार बन सकते हैं, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी।

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