परिचय
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) किसी देश में एक विदेशी कंपनी द्वारा किए गए निवेश को संदर्भित करता है। यह निवेश केवल धन हस्तांतरण तक सीमित नहीं होता, बल्कि इसमें विदेशी कंपनियों द्वारा किसी व्यवसाय की प्रत्यक्ष स्वामित्व भागीदारी भी शामिल होती है। भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया गया है –
- सरकारी अनुमोदन मार्ग
- स्वचालित मार्ग (Automatic Route)
सरकारी अनुमोदन मार्ग के तहत निवेश के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या भारत सरकार से पूर्व अनुमति लेना आवश्यक होता है, जबकि स्वचालित मार्ग में यह आवश्यकता नहीं होती। इस लेख में हम उन क्षेत्रों पर चर्चा करेंगे जो “100% तक स्वचालित मार्ग” श्रेणी में आते हैं और यह किस प्रकार कार्य करता है।
स्वचालित मार्ग (Automatic Route) क्या है और यह कैसे कार्य करता है?
स्वचालित मार्ग वह प्रक्रिया है जिसमें विदेशी निवेशकों को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या सरकार से किसी पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। इस प्रक्रिया को सरल और तेज़ बनाने के लिए सरकार ने कई क्षेत्रों को इस श्रेणी में रखा है ताकि विदेशी कंपनियाँ बिना किसी बाधा के निवेश कर सकें।
इस मार्ग के तहत आने वाले निवेशों के लिए निवेशक को 30 दिनों के भीतर भारतीय रिज़र्व बैंक को सूचित करना होता है। स्वचालित मार्ग से विदेशी निवेश भारत की अर्थव्यवस्था में प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी बढ़ाने में मदद करता है।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रकार
भारत में विदेशी निवेश को तीन मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जाता है:
- ऊर्ध्वाधर पूंजी निवेश (Vertical Investment)
- इसमें एक कंपनी किसी अन्य देश में अपने सप्लाई चेन के विभिन्न चरणों में निवेश करती है।
- उदाहरण: एक विदेशी ऑटोमोबाइल कंपनी का भारत में कार स्पेयर पार्ट्स निर्माण में निवेश करना।
- क्षैतिज पूंजी निवेश (Horizontal Investment)
- इसमें एक कंपनी अपने देश में किए गए व्यवसाय को ही किसी अन्य देश में दोहराती है।
- उदाहरण: एक अमेरिकी रेस्टोरेंट चेन का भारत में अपनी नई शाखा खोलना।
- कांग्रेस पूंजी निवेश (Conglomerate Investment)
- इसमें विदेशी कंपनी किसी नए क्षेत्र में निवेश करती है जो उसके मुख्य व्यवसाय से अलग होता है।
- उदाहरण: कोई टेक कंपनी भारत में फार्मा सेक्टर में निवेश करती है।
स्वचालित मार्ग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख क्षेत्र
भारत सरकार द्वारा 2020 में घोषित एफडीआई नीति के अनुसार, निम्नलिखित क्षेत्रों में 100% तक स्वचालित मार्ग से विदेशी निवेश की अनुमति है –
1. मेडिकल डिवाइसेज (Medical Devices) – 100%
भारत में मेडिकल डिवाइस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इसमें 100% FDI की अनुमति स्वचालित मार्ग के तहत दी गई है। हालाँकि, यदि कोई मौजूदा भारतीय कंपनी में निवेश करना चाहता है तो उसे सरकारी अनुमोदन लेना पड़ता है।
2. इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियाँ (Infrastructure Companies in Securities Market) – 49%
सिक्योरिटीज मार्केट में इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों में अधिकतम 49% विदेशी निवेश की अनुमति है। इस निवेश पर निर्णय भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) द्वारा संयुक्त रूप से किया जाता है।
3. पेंशन फंड (Pension Fund) – 49%
भारत सरकार ने पेंशन फंड में 49% तक विदेशी निवेश की अनुमति दी है। यह निवेश “पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण अधिनियम, 2013” के तहत होता है।
4. बीमा क्षेत्र (Insurance Sector) – 49%
बीमा क्षेत्र में 49% तक स्वचालित मार्ग के तहत विदेशी निवेश की अनुमति है। इसका उद्देश्य इस क्षेत्र में विदेशी पूँजी लाकर बीमा सेवाओं की गुणवत्ता और विस्तार को बढ़ावा देना है।
5. पेट्रोलियम रिफाइनिंग (Petroleum Refining – PSU) – 49%
सरकारी उपक्रमों द्वारा संचालित पेट्रोलियम रिफाइनिंग कंपनियों में 49% विदेशी निवेश की अनुमति है। हालाँकि, इस क्षेत्र में कोई नई परियोजना शुरू करने के लिए सरकार से अनुमति लेनी होती है।
6. पावर एक्सचेंज (Power Exchange) – 49%
भारत में पावर एक्सचेंज सेक्टर को मजबूती देने के लिए इसमें 49% तक विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है। वर्तमान में, भारत में दो प्रमुख पावर एक्सचेंज कार्यरत हैं:
- इंडिया एनर्जी एक्सचेंज (IEX)
- पावर एक्सचेंज इंडिया लिमिटेड (PXIL)
7. कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (Core Investment Company) – 100%
इस क्षेत्र में पूरी तरह से विदेशी निवेश को अनुमति दी गई है। यह निवेश गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के अंतर्गत आता है जो विभिन्न वित्तीय गतिविधियों में संलग्न रहती हैं।
स्वचालित मार्ग के लाभ
स्वचालित मार्ग से भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के कई लाभ हैं:
- सरल प्रक्रिया – निवेशकों को सरकार या RBI से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती, जिससे समय की बचत होती है।
- आर्थिक विकास – विदेशी पूंजी के आगमन से देश के बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- नौकरी के अवसर – नए निवेश से विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं।
- प्रौद्योगिकी स्थानांतरण – विदेशी कंपनियाँ उन्नत तकनीकों को भारतीय बाजार में लाती हैं जिससे उद्योगों की दक्षता में सुधार होता है।
- प्रतिस्पर्धा में वृद्धि – विदेशी निवेश के कारण भारतीय कंपनियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ती है जिससे उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होता है।
निष्कर्ष
भारत सरकार ने स्वचालित मार्ग के माध्यम से विदेशी निवेश को सरल और पारदर्शी बनाया है। यह नीति भारत में विभिन्न उद्योगों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए सक्षम बनाने में सहायक है। विदेशी निवेशकों के लिए अब भारत में निवेश करना पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक हो गया है।
इस मार्ग के तहत निवेश करने वाले विदेशी कंपनियों को केवल भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को 30 दिनों के भीतर सूचित करना होता है। यह प्रक्रिया न केवल निवेश को आसान बनाती है बल्कि विदेशी पूँजी के आगमन को भी प्रोत्साहित करती है।
स्वचालित मार्ग के तहत आने वाले क्षेत्रों में निवेश से भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होगा।

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