विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) भारत के आर्थिक विकास के लिए एक महत्वपूर्ण पूंजी स्रोत है। 1991 के आर्थिक सुधारों के बाद, भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था को उदार बनाया और तब से देश में FDI की मात्रा में लगातार वृद्धि हुई है। भारत आज “ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस” (Ease of Doing Business – EoDB) में शीर्ष 100 देशों में शामिल है और ग्रीनफील्ड FDI के मामले में विश्व में अग्रणी स्थान पर है।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) का अर्थ
जब कोई विदेशी कंपनी किसी अन्य देश की व्यावसायिक इकाई में निवेश करती है, तो इसे विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) कहा जाता है। जो विदेशी कंपनियां FDI में संलग्न होती हैं, वे उस देश की व्यावसायिक गतिविधियों में सीधे भाग लेती हैं जिसमें वे निवेश कर रही होती हैं।
FDI तब होता है जब कोई निवेशक विदेश में व्यावसायिक गतिविधियों की स्थापना करता है या किसी विदेशी कंपनी के स्वामित्व या प्रबंधन को अधिग्रहित करता है।
भारत में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) मुख्य रूप से दो मार्गों के माध्यम से किया जाता है:
- स्वचालित मार्ग (Automatic Route)
- सरकारी मार्ग (Government Route)
स्वचालित मार्ग में निवेश करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या भारत सरकार से पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होती, जबकि सरकारी मार्ग में पहले सरकार से अनुमति लेनी होती है।
FDI प्राप्त करने के मार्ग
1. सरकारी मार्ग (Government Route)
इस मार्ग के तहत निवेश करने के लिए सरकार से पूर्व अनुमोदन (Approval) आवश्यक होता है। कंपनी को “विदेशी निवेश सुविधा पोर्टल” (Foreign Investment Facilitation Portal – FIFP) के माध्यम से आवेदन जमा करना होता है। यह आवेदन संबंधित मंत्रालय को भेजा जाता है, जो उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से परामर्श करने के बाद स्वीकृति या अस्वीकृति का निर्णय लेता है।
2. स्वचालित मार्ग (Automatic Route)
इस मार्ग के तहत भारतीय कंपनियां विदेशी निवेशकों को अपने शेयर जारी कर सकती हैं और अपनी चुकता पूंजी का 100% हिस्सा निवेशकों को दे सकती हैं। इस प्रक्रिया में निवेशकों को सरकार से पूर्व अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होती।
100% सरकारी मार्ग के अंतर्गत आने वाले प्रमुख क्षेत्र
1. बैंकिंग और सार्वजनिक क्षेत्र (Banking & Public Sector) – 20%
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में FDI को 20% तक सीमित रखा गया है। यह मुख्य रूप से बैंकों की सुरक्षा और उनके सार्वजनिक हितों की रक्षा के लिए किया गया है।
2. प्रसारण सामग्री सेवाएँ (Broadcasting Content Services) – 49%
इस क्षेत्र में अधिकतम 49% तक विदेशी निवेश की अनुमति है। यह निवेश टीवी चैनलों के अपलिंकिंग और डाउनलिंकिंग, एफएम रेडियो, और डिजिटल मीडिया जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।
3. कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियाँ (Core Investment Companies) – 100%
कोर इन्वेस्टमेंट कंपनियों (CICs) को 100% विदेशी निवेश की अनुमति है, लेकिन इसे सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होती है।
4. खाद्य उत्पाद खुदरा व्यापार (Food Product Retail Trading) – 100%
खाद्य उत्पादों की खुदरा बिक्री के क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति है, लेकिन निवेशकों को इस प्रक्रिया में सरकार की मंजूरी लेनी होगी।
5. खनन और खनिज पृथक्करण (Mining & Mineral Separation) – 100%
मिनरल्स और खनन से संबंधित क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को निवेश करने की अनुमति है, लेकिन सरकार की मंजूरी अनिवार्य है।
6. मल्टी-ब्रांड रिटेल ट्रेडिंग (Multi-Brand Retail Trading) – 51%
भारत में मल्टी-ब्रांड रिटेल व्यापार में विदेशी निवेश की सीमा 51% है। हालांकि, इस निवेश को सरकार की अनुमति की आवश्यकता होती है।
7. प्रिंट मीडिया (Print Media) – 100%
प्रिंट मीडिया से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में 100% तक निवेश किया जा सकता है, लेकिन इसमें सरकार से पूर्व अनुमोदन लेना आवश्यक होता है।
8. समाचार पत्र और पत्रिकाओं का प्रकाशन (Publishing of Newspapers & Periodicals) – 26%
विदेशी कंपनियाँ समाचार पत्रों, पत्रिकाओं और समाचार आधारित सामग्रियों के प्रकाशन में 26% तक निवेश कर सकती हैं।
9. उपग्रह संस्थान और संचालन (Satellite Establishment & Operations) – 100%
भारत सरकार ने उपग्रह संचार और प्रक्षेपण सेवाओं में 100% FDI को अनुमति दी है, लेकिन इसे सरकार की स्वीकृति की आवश्यकता होती है।
विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) पर प्रतिबंधित क्षेत्र
सरकार ने कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में FDI को प्रतिबंधित किया है। इन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियां निवेश नहीं कर सकतीं:
- परमाणु ऊर्जा उत्पादन
- सट्टेबाजी और जुआ
- चिट फंड और निधि कंपनियाँ
- कृषि और वृक्षारोपण (कुछ अपवादों के साथ जैसे चाय बागान, पशुपालन, मत्स्य पालन, आदि)
- रियल एस्टेट और हाउसिंग (टाउनशिप को छोड़कर)
- तंबाकू और सिगरेट उत्पादन
100% स्वचालित मार्ग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र
इसके अलावा, कुछ ऐसे क्षेत्र भी हैं जहां 100% विदेशी निवेश स्वचालित मार्ग के माध्यम से किया जा सकता है। इसमें शामिल हैं:
- कृषि और संबंधित गतिविधियाँ
- हवाई परिवहन सेवाएँ
- बंदरगाह और नौवहन
- सड़क और राजमार्ग निर्माण
- सूचना प्रौद्योगिकी और BPM
- जैव प्रौद्योगिकी
- रेलवे अवसंरचना
- अक्षय ऊर्जा
FDI के लाभ
- भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने में मदद मिलती है।
- अंतर्राष्ट्रीय तकनीक और विशेषज्ञता भारतीय बाजार में आती है।
- देश में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।
- अवसंरचना और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलता है।
- वैश्विक कंपनियों को भारत में व्यापार करने में आसानी होती है।
निष्कर्ष
भारत सरकार द्वारा 100% सरकारी मार्ग के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों के लिए FDI को नियंत्रित किया जाता है ताकि देश की सुरक्षा और आर्थिक संरचना को बनाए रखा जा सके।
हालांकि, विदेशी निवेशकों को सरकार की मंजूरी की आवश्यकता होती है, फिर भी यह भारत में व्यापार करने के लिए एक सुनहरा अवसर है। सरकार द्वारा जारी FDI नीतियों के तहत विभिन्न क्षेत्रों में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।

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