उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजर्व: एक विस्तृत अध्ययन

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परिचय

टाइगर रिजर्व एक संरक्षित क्षेत्र होता है, जिसे बाघों के संरक्षण के लिए विशेष रूप से बनाया गया है। भारत में कुल 53 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें से तीन टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश में स्थित हैं। ये हैं:

  1. लखीमपुर टाइगर रिजर्व (दुधवा टाइगर रिजर्व) – लखीमपुर खीरी जिले में स्थित
  2. पीलीभीत टाइगर रिजर्व – शाहजहांपुर और पीलीभीत जिलों में फैला
  3. बिजनौर टाइगर रिजर्व (अमांगढ़ टाइगर रिजर्व) – बिजनौर जिले के अमांगढ़ क्षेत्र में

ये टाइगर रिजर्व न केवल बाघों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि इनका पारिस्थितिक और जैव विविधता में भी बड़ा योगदान है। अब आइए, इन टाइगर रिजर्व के बारे में विस्तार से जानते हैं।


1. लखीमपुर टाइगर रिजर्व (दुधवा टाइगर रिजर्व)

परिचय

लखीमपुर टाइगर रिजर्व को दुधवा टाइगर रिजर्व भी कहा जाता है। यह भारत-नेपाल सीमा के पास स्थित है और इसमें तीन मुख्य क्षेत्र आते हैं:

  • दुधवा नेशनल पार्क
  • कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य
  • किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य

इस रिजर्व को 1987 में “प्रोजेक्ट टाइगर” के तहत टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया था। यह बाघों के अलावा तेंदुआ, एशियाई काले भालू, सुस्त भालू, गैंडा, हाथी और दलदली हिरण जैसी कई वन्यजीव प्रजातियों का भी निवास स्थान है।

भौगोलिक स्थिति और पारिस्थितिकी

  • यह टाइगर रिजर्व 1284.3 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • मोहन और दुधवा नदियाँ इस रिजर्व से होकर बहती हैं।
  • यहाँ प्राकृतिक झीलें, छोटे-छोटे जल स्रोत, और समृद्ध जैव विविधता पाई जाती है।
  • यह क्षेत्र इंडो-गंगा मैदान में स्थित है, जो इसे वन्यजीवों के लिए उपयुक्त बनाता है।

प्रमुख वनस्पति और जीव-जंतु

  • यहाँ का मुख्य वनस्पति प्रकार साल वृक्षों का जंगल है।
  • 450 से अधिक पक्षी प्रजातियाँ इस क्षेत्र में पाई जाती हैं।
  • यह उत्तर प्रदेश का एकमात्र स्थान है, जहाँ बाघ और गैंडे एक साथ पाए जाते हैं
  • 2021 की टाइगर जनगणना के अनुसार, यहाँ 107 बाघों की संख्या दर्ज की गई थी।

2. पीलीभीत टाइगर रिजर्व

परिचय

पीलीभीत टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर और पीलीभीत जिलों में फैला हुआ है।

  • यह टाइगर रिजर्व 730.24 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।
  • यह भारत-नेपाल सीमा पर “तराई आर्क लैंडस्केप” का हिस्सा है।
  • इसे 2014 में टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया
  • 2020 में, इसे अंतरराष्ट्रीय “TX2 अवार्ड” मिला, क्योंकि इसने चार साल में बाघों की संख्या दोगुनी कर दी।

वन्यजीव और जैव विविधता

  • इस रिजर्व में 326 पक्षी प्रजातियाँ, 127 जानवरों की प्रजातियाँ और 2100 से अधिक फूलों वाले पौधे हैं।
  • प्रमुख वन्यजीवों में दलदली हिरण, तेंदुआ, बंगाल फ्लोरिकन, और बाघ शामिल हैं।
  • यहाँ का मुख्य वनस्पति क्षेत्र भी साल वृक्षों का जंगल है।
  • पिछली जनगणना के अनुसार, इस रिजर्व में 65 बाघों की संख्या दर्ज की गई थी।

3. बिजनौर टाइगर रिजर्व (अमांगढ़ टाइगर रिजर्व)

परिचय

बिजनौर टाइगर रिजर्व, जिसे अमांगढ़ टाइगर रिजर्व भी कहा जाता है, उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में स्थित है। यह उत्तर प्रदेश का सबसे सुंदर और समृद्ध जैव विविधता वाला टाइगर रिजर्व माना जाता है।

  • इसे 2012 में टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
  • यह 95 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • यह रिजर्व गीले मैदान, घने जंगल और घास के मैदानों से भरपूर है।

विशेषताएँ और पारिस्थितिकी

  • यह कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निकट स्थित है, इसलिए इसे कॉर्बेट का बफर जोन भी कहा जाता है।
  • यह बाघ, हाथी, तेंदुआ, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, और अजगर जैसे वन्यजीवों का घर है।
  • यहाँ सोने की पीठ वाला कठफोड़वा, ग्रे हॉर्नबिल और रेड जंगल फाउल जैसी दुर्लभ पक्षी प्रजातियाँ भी पाई जाती हैं।
  • पिछली जनगणना के अनुसार, इस रिजर्व में लगभग 27 बाघ थे।

उत्तर प्रदेश के टाइगर रिजर्व का महत्व

1. पारिस्थितिक संतुलन में योगदान

बाघ जंगलों के स्वास्थ्य के सूचक होते हैं। अधिक बाघों की उपस्थिति का मतलब है कि जंगल स्वस्थ और संतुलित हैं। टाइगर रिजर्व के कारण उत्तर प्रदेश के जंगलों की जैव विविधता बनी रहती है और पारिस्थितिक संतुलन कायम रहता है।

2. पर्यटन और अर्थव्यवस्था

उत्तर प्रदेश के ये टाइगर रिजर्व वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं।

  • इन टाइगर रिजर्व में सफारी और इको-टूरिज्म से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है
  • विदेशी और घरेलू पर्यटकों से राज्य की अर्थव्यवस्था को भी लाभ होता है।

3. वन्यजीव संरक्षण और अनुसंधान

इन टाइगर रिजर्वों में वन्यजीव संरक्षण के लिए शोध और अध्ययन किए जाते हैं।

  • बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए संरक्षण परियोजनाएँ चलाई जाती हैं।
  • इन संरक्षित क्षेत्रों में बाघों की निगरानी के लिए कैमरा ट्रैपिंग और रेडियो कॉलर तकनीक का उपयोग किया जाता है।

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख टाइगर रिजर्व – दुधवा (लखीमपुर), पीलीभीत और अमांगढ़ (बिजनौर), राज्य और देश के वन्यजीव संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • दुधवा टाइगर रिजर्व (लखीमपुर) सबसे पुराना और सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है, जहाँ बाघों और गैंडों का अनूठा मेल देखने को मिलता है।
  • पीलीभीत टाइगर रिजर्व ने अंतरराष्ट्रीय TX2 पुरस्कार जीतकर बाघ संरक्षण में अपनी सफलता साबित की है।
  • अमांगढ़ टाइगर रिजर्व, कॉर्बेट के निकट होने के कारण, बाघों और अन्य वन्यजीवों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बन गया है।

इन टाइगर रिजर्वों के कारण उत्तर प्रदेश न केवल वन्यजीवों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, बल्कि राज्य की पर्यावरणीय और आर्थिक समृद्धि में भी सहायक बन रहा है। सरकार और स्थानीय लोगों को मिलकर इन टाइगर रिजर्वों की रक्षा करनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को भी यह प्राकृतिक धरोहर देखने का अवसर मिल सके।

Magnificent tiger strolls beside calm water, bathed in warm light Perfect for wildlife documentaries and conservation campaigns.

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2Comments

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  1. 2
    LuigiCricy


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